Monday, January 25, 2010

sunday

दिन की शुरुआत ठीक ही रही ..दो की जगह चार अख़बार पढने को मिले times of india
ने saturday को एक स्पेशल issue निकला है ठीक है ..गुनगुनी धुप मैं मन तो यही कर रहा था की अख़बार पढ़ते पढ़ते सो जाऊं
पर हर किसी को मुक़म्मल जहाँ नहीं मिलता ..pump जाना मजबूरी है ...
.इस सिरे से उस सिरे तक सब शरीके जुर्म हैं
आदमी या तो जमानत पर रिहा है या फरार....

आप जब किसी सिस्टम मैं काम करते हैं तो एक अलग बात होती है जब लोग आपके सिस्टम
मैं काम करते हैं तो आप को लगातार जागना होता है ..कभी कभी सिस्टम की पहरेदारी करते करते
मन थक जाता है और झल्ला के जी करता है की जो हो रहा है सो होने दो ,सब छोड़ कर फुर्सत के रात दिन तलाशने निकल पड़ो
पर माया....जी हाँ माया .चैन कब लगने देती है ..माया का दूसरा अर्थ मोह भी है जो पैसे से ज्यादा खतरनाक तरीके की माया है
अपने सिस्टम का मोह ..उस पर की गयी मेहनत का मोह ..उसी मोह में अपने सिस्टम को बचाने और चलाने
के लिए हम दिन रात मरते और खपते हैं यहाँ नौकरी और व्यापार के बीच पतली किन्तु गहरी लकीर है ..एक में सिस्टम follow करना
है दुसरे में सिस्टम को follow करवाना है ..दूसरा पहले से कहीं कठिन है.. पर एक अच्छी टीम का होना दोनों ही परिस्थितियों में भाग्य पर निर्भर करता है
हाँ नियंत्रण दोनों में हो पर...
जरुरत से जियादा बंदिशें वेह्शत बढाती है
इसी वेह्शत में तो दरिया किनारे तोड़ देते हैं ..
सो सोचा pump तो जायेंगे पर टहल कर लौट आएंगे बिना किसी को डांटे फटकारे बिना किसी की कमी निकाले...इसका भी एक अलग सुख है.

Saturday, January 23, 2010


आज यका यक एक ग़ज़ल कहीं बजती सुनी मैं वहां से सेकेंड्स मैं गुज़र गया पर मेरी आँखों मैं एक दौर तैर गया 90,91 का दौर ..
............आह का वह दौर ......

मुझे दे रहे हैं तसल्लियाँ वो हर एक ताज़ा बयान से
कभी aake मंज़रे आम पे कभी hat के मंज़रे-ऐ-आम से

न गरज किसी से न वास्ता , मुझे काम अपने ही काम से ,..
तेरे ज़िक्र से ,तेरी फिक्र से ,तेरी याद से ,तेरे नाम से....

तेरी सुबह ऐसे है क्या बला, तुझे ए फलक जो हो हौसला
कभी करले आके मुकाबिला ,गम -ऐ- हिज्र -ऐ- यार की शाम से
याद है मुझे लग भग पूरी ग़ज़ल याद है
पता नहीं किसने लिख दी और कौन गा गया था एक -एक शेर जैसे स्याह मंज़र मैं रेंगती कोई दर्द की लकीर
और इर्द गिर्द इकठए कुछ यार दोस्त .......मुझे याद है हमारे बीच एक शख्श था जो इस तरह की ग़ज़ल हम लोगों को लाकर दिया करता था और हमारी उम्र भी येही कोई १९, २०
साल की........... जब दर्द से नए- नए रु-बरु हो रहे थे . उम्र का यह वो दौर होता है जब आप ऐसे ही मंज़र में जा ही फंसते हैं जहां आपके दोस्तों के अलावा कोई आपको नहीं समझता ,नहीं समझना चाहता.. बस एक धुन ...रगों मैं दौड़ते लावा की तरह ...तेरे ज़िक्र से ...तेरी फिक्र से... तेरी याद से ...तेरे नाम से
उम्र का न भुलाया जाने वाला वह दौर अज़ीम है ....

Thursday, January 14, 2010

एक मुलाक़ात

आज आप से मिलकर अच्छा लगा । कहाँ तक आप गए । पूरी एक कमिश्नरी की सदारत आप के हाँथ में रही और आज एक रूमानी ख्वाइश के इर्द गिर्द तसल्ली तलाश कर खुश ही दिखे । यूँ मैं नहीं समझ पारहा हूँ की जिस काम से आप से मिलने गया था वो हो पायेगा या नहीं पर मन एक चीज देखकर बहुत हैरान है की कैसे होता है जब एक वक़्त होता है सूरज आपके आंगन में पनाह लेता है और एक वक़्त ऐसा भी जब आप के फ्लैट मैं सूरज की शायद ही कोई किरण आती हो ॥ आप दो रह जाते हैं । और सबसे बड़ी बात बिना किसी गिला शिकवा के अपने आप में डूबे ।

बहुत छोटी जिंदगी

बहुत ज़ल्दी गुज़र जाएँ गे सारे पड़ाव

जवानी ..शोहरत ओहदा का दौर यूँ फुर्र हो जायेगा ,

इतराना इनपर कैसा

आज बहुत सोचा .... कमाना क्या है ? और गंवाना क्या ?

Wednesday, January 13, 2010

कभी टूट पड़ना
कभी टूट कर गिर पड़ना
कभी घमासान मचाते विचारों की चिल्ल पौं
और कभी कातरता से दिवार पे टंगी उस की तस्वीर से दो चार होना
मानो गुस्से ने भी अब आने से इंकार कर दिया हो और ये कह के अलग बैठ जाये की तुम्हारी परेशानी मैं भी दूर नहीं कर सकता अपने आप से जंग होते किसी ने देखी होगी वो ही इसे समझ पायेगा ...जब खुद हम अपने आप से नाराज रहते हों तो ...अपने आप से अपने लिए समय मांगते हों .. .खुद को ही टरकाते हों ॥
...........अभी हाल में एक फिल्म देखी... short cut to happiness...क्या आप एक ऐसे माहौल में रह सकते हैं जहाँ आप के achivement कुछ भी नहीं.........आप के project fail की श्रेणी मैं हों .......आप flop हों ..idealess हों ..पर लोग आप के इर्द गिर्द रहें आप के fan हों आप पर मरते हों पैसा आये शोहरत बढे popularity मिले स्टार बन जाएँ ........किन्तु आप ये जानते हों की मैं myself is a flop .... समाज को कुछ भी योगदान नहीं है मेरा ..सोचिए हैना.... भयावह condition ...वो एक hypothetical condition नहीं है । मैं ऐसे लोगों को जनता हूँ जो ... shortcut to happiness ...जैसे ही हैं। पर ग्लानी नहीं होती उन्हें ...और में पूरा होने को परेशां रहता हूँ ....धर्म से पूरा कर्म से से पूरा ..मर्म से पूरा होने को .... से लम्बी यात्रा की आपनी परेशानियाँ हैं ।
आप to बस सुन लो ...समझना चाहा तो सर दर्द हो उठेगा ...anyway goodnight

नैना ठग लेंगे

जो गम होंगे तो कुछ किस्से कहने को रह जायेंगे .
उम्र कटेगी गिरते पड़ते ,हम दरिया कहलायेंगे .
ऊपर वाला बड़ा खिलाडी ये तय है वो जीतेगा
हम हारेंगे हार के यारों फिर मंदिर को जायेंगे
ये भी कहने का दिल है की
कभी आह लब पे मचल गए ,कभी अश्क आँख से ढल गए
ये तुम्हारे गम के चराग हैं कभी बुझ गए, कभी जल गए

जो फना हुए गम-a- इश्क में ,उन्हें ज़िन्दगी का न गम हुआ
जो न अपनी आग में जल सके, वो पराई आग में जल गए


दर्द की दास्ताँ है प्यारे ..अपनी अपनी जुबान है प्यारे

दिल हूँ हूँ करे...... .घबराये ...

डुबोया मुझ को होने ने , न होता में तो क्या होता
हुई मुददत के ग़ालिब मरगया.. पर याद आता है
वो हर एक बात पे कहना कि ..यूँ होता तो क्या होता ....

कि यूँ होता तो क्या होता ॥


नैना ठग्लेंगे....

Tuesday, January 12, 2010

23 नवम्बर से काफी टाइम हो गया ,,,
कुछ थोड़े बहुत काम कर लिए
कुछ सच छुपा लिए
कुछ झूठ बोल लिए
कुछ बहाने बुनलिए
कुछ पैसे जोड़ लिए
कहीं थोड़ी बहुत देर को चलेगये
और
कहीं से उकता के भाग आए
to कहीं से घबरा के भाग आये ,
,,दिन तो कट गए ...
par बोझ नहीं घटे
,मन वैसे ही भारी ..गुम सुम ..कुछ तलाशता सा ॥
रिश्तों पर धूल की परत और मोटी हुई
वे कुछ और ज़मी दोज हुए
हम खलबलाये भी पर
कुछ लोगों का ध्यान भी शायद उधर न गया ..... खैर
बारामासी पढ़ डाली ।
अजमेर हो आए ।
पापा के लिए कार खरीद ली ।
मम्मी अब कहती हैं बेकार खरीद्ली ॥
बीबी के भाई का फ़ोन नहीं उठाया ,,
,सास ने शायद .शायद ..लखनऊ बुलाया ॥
income tax के पेपर तैयार नहीं हों पाए ॥
स्टाफ भाग गया ॥ genrator ख़राब हो गया
घर पर पुताई लगवा दी मन गन्दा हो सा रहा था ..
.ठीक ठीक पता नहीं .....
या पता ही ठीक नहीं .....सांसें चलती रही ॥
जिंदगी का क्या सोचना ॥ चली तो ठीक न चली तो ............ i quit ....