Saturday, May 23, 2015

जो नाक पे है गुस्सा

खबर खराब थी ,
या पी शराब थी 
तकलीफ में थे तुम ,
या खुद में ही थे गुम
नज़र में आ गए
या धोका खा गए
नरम गरम अजब करम दिखे बहुत लगे जो कम  ,,,,,महीन सा ये ,,,,,गुस्सा
है नाक पे जो गुस्सा
जता भी न सके ,
छुपा भी न सके
तो है फिजूल गुस्सा

Wednesday, May 13, 2015

ग़ज़ल

फ़क़त इतना गुमां दिल में लिए हूँ,
तेरी महफिल में सबसे कम पिए हूँl

ब जाहिर आशिकी होती भी कैसे,
नज़र के साथ होठों  को सीये हूँl

ख्यालों ख्वाहिशों की कसमकश में
मैं रोना दोस्ती का भी लिए हूँl

ये अहसां दर्ज है हर्फ ए वफा मे,
तकादा तुम से अबतक कब किए हूँ

सुमति